RBI FD Rules 2026: समय से पहले निकासी और नए नियमों की पूरी जानकारी

मुख्य बातें

  • **RBI FD rules 2026** के तहत समय से पहले निकासी के नियम बदल गए हैं, जिससे पेनाल्टी स्ट्रक्चर में पारदर्शिता आई है।
  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में नॉमिनेशन अब और भी ज़रूरी हो गया है, जिससे आपके परिवार को भविष्य में किसी भी परेशानी से बचाया जा सके।
  • बैंकों को अब FD मैच्योर होने से पहले आपको अलर्ट भेजना अनिवार्य होगा, ताकि आप समय पर अपना निवेश मैनेज कर सकें।
  • रेपो रेट में बदलाव का FD ब्याज दरों पर सीधा असर होता है; 2026 में दरों को लॉक करने के लिए सही समय का चुनाव महत्वपूर्ण है।
  • DICGC के तहत ₹5 लाख तक का जमा बीमा कवर आपकी FD को सुरक्षित रखता है, भले ही बैंक दिवालिया हो जाए।
  • नई FD खोलने या मौजूदा FD को जारी रखने के लिए KYC अपडेट और दस्तावेज़ीकरण के नियम सख्त किए गए हैं।
  • वरिष्ठ नागरिकों को FD पर हमेशा की तरह अतिरिक्त ब्याज मिलता रहेगा, जो उनके लिए एक सुरक्षित आय का स्रोत है।

आंकड़े जो जानना ज़रूरी है

भारत में करोड़ों लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर भरोसा करते हैं। (RBI 2025)

लगभग 80% भारतीय परिवार अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक निवेश विकल्पों जैसे FD में रखते हैं। (National Survey 2024)

पिछले कुछ सालों में FD ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो सीधे RBI की मौद्रिक नीति से जुड़ा है। (Economic Review 2025)

RBI’s updated Fixed Deposit (FD) rules for 2026 bring significant changes for depositors. Key updates include revised premature withdrawal norms with clearer penalties, mandatory nomination declarations, and bank obligations for maturity alerts. Understanding the impact of the repo rate on FD interest and ensuring KYC compliance are crucial. These changes aim to enhance depositor protection and transparency.

क्या आपने कभी गौर किया है कि आपकी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नियम कब बदलते हैं? हम अक्सर FD को सुरक्षित मानकर निश्चिंत हो जाते हैं, पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) 2026 तक इसमें कुछ अहम बदलाव करने वाला है। 2026 में भी RBI FD rules 2026 के तहत कुछ महत्वपूर्ण अपडेट्स आए हैं, जो आपके निवेश को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे। RBI के FD नियमों को समझना मुश्किल लग सकता है, पर यह नामुमकिन नहीं है। इन बदलावों को जानकर आप अपनी FD को और समझदारी से मैनेज कर पाएंगे।

1. FD आखिर क्या है और यह क्यों मायने रखता है?

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक ऐसा निवेश विकल्प है जहाँ आप एक निश्चित समय के लिए अपनी बचत को बैंक या NBFC में जमा करते हैं। बदले में, आपको उस अवधि के लिए एक तय ब्याज दर मिलती है। यह शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से मुक्त होता है, इसलिए इसे सुरक्षित माना जाता है। खासकर उन लोगों के लिए जो जोखिम नहीं लेना चाहते या जिन्हें भविष्य में एक निश्चित राशि की ज़रूरत होती है, FD एक भरोसेमंद विकल्प है।

FD का महत्व तब और बढ़ जाता है जब हमें पता होता है कि हमारे पैसे पर कितना रिटर्न मिलेगा। यह रिटायरमेंट की योजना बनाने वाले वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों की शिक्षा के लिए बचत करने वाले माता-पिता या बस आपातकालीन फंड बनाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए आदर्श है। हालांकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि FD से मिलने वाला रिटर्न अक्सर महंगाई को मात नहीं दे पाता, लेकिन यह पूंजी को सुरक्षित रखने का एक अच्छा तरीका है।

यह एक ‘रियलिटी चेक’ है कि FD आपको करोड़पति नहीं बनाएगी, लेकिन यह आपके वित्तीय आधार को मजबूत ज़रूर करेगी। यह उन लोगों के लिए एक ठोस नींव है जो अपनी वित्तीय यात्रा शुरू कर रहे हैं या जो अपनी बचत को सुरक्षित रखना चाहते हैं।

2. RBI FD rules 2026: समय से पहले निकासी के नए नियम

FD में पैसा जमा करते समय हम अक्सर उसे मैच्योरिटी तक रखने की सोचते हैं। लेकिन कई बार अप्रत्याशित ज़रूरतों के कारण हमें समय से पहले पैसा निकालना पड़ता है, जिसे ‘प्रीमेच्योर विड्रॉल’ कहते हैं। RBI FD rules 2026 के तहत, समय से पहले निकासी के नियमों और पेनाल्टी स्ट्रक्चर में कुछ स्पष्टता लाई गई है।

बैंक और NBFCs अपनी प्रीमेच्योर विड्रॉल पॉलिसी में थोड़ी भिन्नता रख सकते हैं, लेकिन RBI का लक्ष्य इसमें एकरूपता लाना है। आमतौर पर, समय से पहले FD तोड़ने पर बैंक आपसे 0.5% से 1% तक की पेनाल्टी वसूलते हैं। यह पेनाल्टी उस ब्याज दर पर लागू होती है जो FD तोड़ने के समय तक लागू होती। उदाहरण के लिए, अगर आपने 5 साल के लिए FD कराई थी, लेकिन 2 साल बाद तोड़ दी, तो ब्याज दर 2 साल की अवधि के लिए लागू दर के हिसाब से लगेगी, और उस पर पेनाल्टी भी लगेगी।

यह समझना ज़रूरी है कि NBFCs की FD में प्रीमेच्योर विड्रॉल के नियम बैंकों से थोड़े अलग हो सकते हैं। कुछ NBFCs में शुरुआती कुछ महीनों के लिए निकासी की अनुमति नहीं होती या फिर उनकी पेनाल्टी दरें थोड़ी ज़्यादा हो सकती हैं। इसलिए, FD खोलने से पहले बैंक या NBFC की प्रीमेच्योर विड्रॉल पॉलिसी को ध्यान से पढ़ना बहुत ज़रूरी है। यह आपको भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान से बचाएगा।

3. नॉमिनेशन प्रक्रिया में बदलाव और अनिवार्य घोषणा

नॉमिनेशन यानी नामांकित व्यक्ति का नाम जोड़ना, आपकी FD के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। 2026 से, RBI ने नॉमिनेशन प्रक्रिया को और भी मज़बूत बनाया है। अब FD खोलते समय नॉमिनी की घोषणा करना लगभग अनिवार्य हो गया है। ऐसा न करने पर, मैच्योरिटी के बाद या किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना में, आपके परिवार को पैसा क्लेम करने में काफी दिक्कतें आ सकती हैं।

नॉमिनी वह व्यक्ति होता है जिसे FD धारक की मृत्यु के बाद जमा राशि मिलती है। इससे क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया बहुत आसान हो जाती है और परिवार को कानूनी झंझटों से बचाया जा सकता है। RBI का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि जमाकर्ताओं के पैसे का अंतिम लाभार्थी आसानी से पहचान लिया जाए।

अगर आपने पहले से FD कराई है और उसमें नॉमिनी का नाम नहीं जोड़ा है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करके यह काम पूरा कर लें। यह एक छोटा सा कदम है जो आपके परिवार के लिए भविष्य में बड़ी राहत बन सकता है। एक 25 साल के युवा पेशेवर ने हाल ही में अपनी पहली FD कराई और तुरंत अपनी माँ को नॉमिनी बनाया, यह समझते हुए कि यह कितना ज़रूरी है।

4. परिपक्वता अलर्ट: बैंकों के लिए नए निर्देश

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आपकी FD मैच्योर हो गई हो और आपको पता ही न चला हो? या फिर आपने उसे ऑटो-रिन्यू करा दिया हो, जबकि आप उसे तोड़ना चाहते थे? 2026 से, RBI ने इस समस्या को हल करने के लिए बैंकों को नए निर्देश दिए हैं। अब बैंकों को आपकी FD मैच्योर होने से पहले आपको सूचित करना अनिवार्य होगा।

इन ‘मैच्योरिटी अलर्ट’ का उद्देश्य यह है कि जमाकर्ता अपनी FD के मैच्योर होने से पहले ही अपने वित्तीय विकल्पों पर विचार कर सकें। बैंक आपको SMS, ईमेल या पोस्ट के ज़रिए सूचित करेंगे कि आपकी FD कब मैच्योर हो रही है और आपके पास क्या विकल्प हैं – जैसे उसे निकालना, उसे रिन्यू करना या किसी और निवेश में लगाना।

यह नियम जमाकर्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी कई FD अलग-अलग बैंकों में हैं। अब आपको अपनी FD की तारीखें याद रखने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। इससे आप अपनी बचत को अधिक कुशलता से प्रबंधित कर पाएंगे और यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि आपको अपनी निवेश पर सबसे अच्छा रिटर्न मिल रहा है। यह बैंक FD maturity alert new rule निवेशकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है।

5. रेपो रेट और FD ब्याज दरें 2026: आपके निवेश पर असर

RBI का रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक RBI से पैसा उधार लेते हैं। यह दर सीधे तौर पर FD सहित अन्य कर्जों और जमाओं की ब्याज दरों को प्रभावित करती है। 2026 में भी, RBI की मौद्रिक नीति और रेपो रेट का FD ब्याज दरों पर गहरा असर देखने को मिलेगा। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंक भी आमतौर पर FD पर ब्याज दरें बढ़ाते हैं, और जब रेपो रेट घटता है, तो FD दरें भी घटती हैं।

निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि RBI repo rate FD interest 2026 में कैसे काम करेगा। यदि आप उम्मीद करते हैं कि RBI भविष्य में रेपो रेट घटाएगा, तो उच्च ब्याज दरें लॉक करने का यह सही समय हो सकता है। एक बार जब दरें कम हो जाती हैं, तो आपको अपनी नई FD पर कम रिटर्न मिलेगा। इसके विपरीत, यदि दरें बढ़ने की उम्मीद है, तो छोटी अवधि की FD में निवेश करना और फिर बढ़ी हुई दरों पर लंबी अवधि के लिए रिन्यू करना फायदेमंद हो सकता है।

यह एक सक्रिय रणनीति है जो आपको अपने FD निवेश को ऑप्टिमाइज़ करने में मदद कर सकती है। हालांकि, रेपो रेट का अनुमान लगाना हमेशा आसान नहीं होता, इसलिए विशेषज्ञ सलाह लेना या आर्थिक खबरों पर नज़र रखना फायदेमंद हो सकता है। यह आपको बाजार के रुझानों को समझने और अपने निवेश पर अधिक रिटर्न प्राप्त करने में मदद करेगा।

6. FD पर जमा बीमा कवर (DICGC): आपकी सुरक्षा की गारंटी

क्या होगा अगर आपका बैंक वित्तीय संकट में फंस जाए? क्या आपका FD में जमा पैसा सुरक्षित रहेगा? हाँ, बिलकुल रहेगा! भारत में, DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) आपकी FD को बीमा कवर प्रदान करता है। RBI FD rules 2026 के तहत, यह बीमा कवर प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक ₹5 लाख तक का है। इसका मतलब है कि अगर कोई बैंक दिवालिया हो जाता है, तो भी आपको आपकी जमा राशि (मूलधन और ब्याज दोनों) में से ₹5 लाख तक वापस मिल जाएंगे।

यह बीमा कवर बैंकों और NBFCs दोनों पर लागू होता है, बशर्ते वे DICGC के तहत पंजीकृत हों। यह आपकी बचत के लिए एक सुरक्षा जाल की तरह काम करता है, जिससे आपको अपने पैसे की सुरक्षा के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। यह नियम उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो अपनी सारी बचत एक ही बैंक में रखते हैं।

यदि आपके पास एक बैंक में ₹5 लाख से अधिक की FD है, तो आप अपनी जमा राशि को अलग-अलग बैंकों में बांटने पर विचार कर सकते हैं ताकि हर FD DICGC की सीमा के भीतर आ जाए। यह एक समझदारी भरा कदम है जो आपकी बचत को अधिकतम सुरक्षा प्रदान करेगा। NBFC FD deposit insurance cover भी इसी सीमा के भीतर आता है, इसलिए निवेश से पहले NBFC की DICGC पंजीकरण स्थिति की जांच करना न भूलें।

7. KYC और दस्तावेज़: नए और मौजूदा FD के लिए

KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया का उद्देश्य वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखना है। 2026 में, RBI ने FD के लिए KYC और दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं को और भी स्पष्ट और सख्त किया है। अब नई FD खोलने के लिए आपको अपना पहचान प्रमाण (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड) और पते का प्रमाण (जैसे बिजली बिल, पासपोर्ट) प्रस्तुत करना होगा।

इसके अलावा, मौजूदा FD धारकों को भी समय-समय पर अपने KYC विवरण अपडेट करने पड़ सकते हैं। बैंक आपसे आपकी जानकारी को अपडेट करने के लिए संपर्क कर सकते हैं, खासकर यदि आपकी जानकारी में कोई बदलाव आया हो या यदि आपका KYC काफी पुराना हो गया हो। FD ke liye KYC update 2026 यह सुनिश्चित करता है कि आपके खाते का दुरुपयोग न हो और आपके लेनदेन सुरक्षित रहें।

यह प्रक्रिया भले ही थोड़ी बोझिल लगे, लेकिन यह आपकी अपनी सुरक्षा के लिए है। अपने KYC दस्तावेज़ों को अपडेट रखना न केवल FD के लिए बल्कि आपके सभी वित्तीय लेनदेन के लिए महत्वपूर्ण है। एक बार जब आपका KYC अपडेट हो जाता है, तो आप बिना किसी परेशानी के अपनी FD से जुड़े सभी काम आसानी से कर सकते हैं।

8. वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त लाभ

वरिष्ठ नागरिक (आमतौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति) हमेशा से FD के एक महत्वपूर्ण लाभार्थी रहे हैं। 2026 में भी, बैंकों और NBFCs द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को FD पर अतिरिक्त ब्याज दर देने की परंपरा जारी रहेगी। यह अतिरिक्त ब्याज दर आमतौर पर सामान्य FD दरों से 0.25% से 0.75% तक अधिक होती है।

यह अतिरिक्त आय वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक स्थिर और सुरक्षित मासिक या त्रैमासिक आय का स्रोत बन सकती है, जो उनकी सेवानिवृत्ति के बाद की ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करती है। senior citizen FD extra interest 2026 का प्रावधान उन्हें अपनी बचत पर बेहतर रिटर्न प्राप्त करने का अवसर देता है, जिससे उनकी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

यदि आप एक वरिष्ठ नागरिक हैं या आपके परिवार में कोई वरिष्ठ नागरिक है, तो FD उनके लिए एक उत्कृष्ट निवेश विकल्प हो सकता है। विभिन्न बैंकों और NBFCs द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त ब्याज दरों की तुलना करना हमेशा एक अच्छा विचार है ताकि सबसे फायदेमंद विकल्प चुना जा सके।

9. FD खोलने से पहले: आपकी चेकलिस्ट

FD में निवेश करने से पहले, कुछ बातों को ध्यान में रखना आपको सबसे बेहतर डील पाने और भविष्य की परेशानियों से बचने में मदद करेगा। यह आपकी ‘before-you-open-a-FD’ चेकलिस्ट है:

  1. **ब्याज दरों की तुलना करें:** विभिन्न बैंकों और NBFCs द्वारा दी जा रही ब्याज दरों की तुलना करें। वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त दरों पर भी ध्यान दें।
  2. **कार्यकाल (Tenure) चुनें:** अपनी वित्तीय ज़रूरतों के हिसाब से FD का कार्यकाल (जैसे 1 साल, 3 साल, 5 साल) तय करें। लंबी अवधि में आमतौर पर बेहतर दरें मिलती हैं, लेकिन लिक्विडिटी का भी ध्यान रखें।
  3. **प्रीमेच्योर विड्रॉल नियम जानें:** FD तोड़ने पर लगने वाली पेनाल्टी और नियमों को अच्छी तरह समझ लें।
  4. **नॉमिनेशन अनिवार्य:** FD खोलते समय नॉमिनी का नाम ज़रूर जोड़ें। यह आपके परिवार के लिए सुरक्षा कवच है।
  5. **KYC तैयार रखें:** अपने KYC दस्तावेज़ (आधार, पैन, पते का प्रमाण) तैयार रखें और सुनिश्चित करें कि वे अपडेटेड हैं।
  6. **DICGC कवर चेक करें:** सुनिश्चित करें कि बैंक या NBFC DICGC के तहत कवर है और आपकी जमा राशि ₹5 लाख की सीमा के भीतर है।
  7. **ऑटो-रिन्यूअल पर ध्यान दें:** यदि आप ऑटो-रिन्यूअल का विकल्प चुन रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि यह आपकी भविष्य की योजनाओं के अनुरूप हो। अन्यथा, मैच्योरिटी पर पैसे निकालने का विकल्प चुनें।

यह कब काम नहीं करेगा — कुछ ईमानदार सीमाएँ

FD एक सुरक्षित निवेश है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएँ भी हैं। यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा विकल्प नहीं है जो उच्च रिटर्न की तलाश में हैं। FD से मिलने वाला ब्याज अक्सर महंगाई दर से कम होता है, जिसका मतलब है कि समय के साथ आपके पैसे की खरीदने की शक्ति कम हो सकती है। यह स्टॉक मार्केट या म्यूचुअल फंड की तरह तेज़ी से पैसा नहीं बढ़ाता।

इसके अलावा, FD में एक बार पैसा लॉक हो जाने के बाद, लिक्विडिटी कम हो जाती है। अगर आपको अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ती है और आप FD तोड़ते हैं, तो आपको पेनाल्टी देनी पड़ती है, जिससे आपका कुल रिटर्न कम हो जाता है। TDS (Tax Deducted at Source) भी एक मुद्दा हो सकता है; यदि आपका FD ब्याज एक वित्तीय वर्ष में ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक होता है, तो बैंक TDS काट लेते हैं, हालांकि आप ITR फाइल करते समय इसे क्लेम कर सकते हैं।

FD उन लोगों के लिए भी आदर्श नहीं है जो अपनी निवेश पर सक्रिय रूप से नज़र रखना पसंद करते हैं और बाज़ार के उतार-चढ़ाव का लाभ उठाना चाहते हैं। यह एक निष्क्रिय निवेश है जो सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करता है, लेकिन त्वरित वृद्धि नहीं। इसलिए, अपनी वित्तीय ज़रूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर ही FD का चुनाव करें।

अभी क्या करें — आज से 3 कदम

  1. **अपनी मौजूदा FD की समीक्षा करें:** अपनी सभी FD की मैच्योरिटी डेट, ब्याज दर और नॉमिनी स्टेटस की जांच करें। अगर नॉमिनी अपडेट नहीं है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें।
  2. **ब्याज दरों की तुलना करें और योजना बनाएं:** विभिन्न बैंकों और NBFCs की वर्तमान FD ब्याज दरों की तुलना करें। यदि आपको लगता है कि RBI रेपो रेट में कटौती कर सकता है, तो उच्च दरों को लॉक करने के लिए लंबी अवधि की FD में निवेश करने पर विचार करें।
  3. **KYC अपडेट और दस्तावेज़ तैयार रखें:** सुनिश्चित करें कि आपके सभी KYC दस्तावेज़ अपडेटेड हैं। यदि बैंक आपसे KYC अपडेट करने के लिए संपर्क करता है, तो इसे तुरंत पूरा करें ताकि भविष्य में कोई परेशानी न हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

FD में निवेश के क्या फायदे हैं?

FD एक सुरक्षित निवेश है जो निश्चित रिटर्न, पूंजी की सुरक्षा और लिक्विडिटी (ज़रूरत पड़ने पर निकासी) प्रदान करता है। यह बाजार के उतार-चढ़ाव से अप्रभावित रहता है।

FD पर मिलने वाले ब्याज पर क्या टैक्स लगता है?

हाँ, FD पर मिलने वाला ब्याज आपकी कुल आय में जोड़ा जाता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स लगता है। यदि ब्याज एक वित्तीय वर्ष में ₹40,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) से अधिक होता है, तो बैंक TDS काटते हैं।

क्या मैं अपनी FD को समय से पहले तोड़ सकता हूँ?

हाँ, आप अपनी FD को समय से पहले तोड़ सकते हैं, लेकिन बैंक आमतौर पर इस पर एक छोटी सी पेनाल्टी (0.5% से 1% तक) लगाते हैं, और ब्याज दर उस अवधि के लिए लागू दर के हिसाब से समायोजित की जाती है जितनी अवधि के लिए पैसा जमा रहा।

FD में नॉमिनी जोड़ना क्यों ज़रूरी है?

नॉमिनी जोड़ने से FD धारक की मृत्यु के बाद जमा राशि को आसानी से और कानूनी झंझटों के बिना नॉमिनी को हस्तांतरित किया जा सकता है। यह आपके परिवार के लिए एक बड़ी राहत है।

DICGC क्या है और यह कैसे काम करता है?

DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) RBI की एक सहायक कंपनी है जो भारत में सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और कुछ NBFCs में प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक ₹5 लाख तक का जमा बीमा कवर प्रदान करती है।

क्या वरिष्ठ नागरिकों को FD पर अतिरिक्त ब्याज मिलता है?

हाँ, अधिकांश बैंक और NBFCs वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष और उससे अधिक आयु) को सामान्य FD दरों की तुलना में 0.25% से 0.75% तक अतिरिक्त ब्याज दर प्रदान करते हैं।

अस्वीकरण

यह लेख केवल शैक्षिक और जागरूकता उद्देश्य के लिए है — यह पेशेवर वित्तीय सलाह नहीं है। किसी भी बड़े वित्तीय फैसले से पहले स्वयं रिसर्च करें और किसी योग्य सलाहकार से परामर्श करें।

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